Jankriti International Magazine Jankriti Issue 27-29, july-spetember 2017 | Page 336

Jankriti International Magazine / जनकृ सत अंतरराष्ट्रीय पसिका ISSN: 2454-2725
िंदभक ग्रन्द्थः- 1. मसंह के दारनाथ, मेरे समय के शब्द, राधाकृ ष्ट्ि प्रकाशन, 1993, पृ.- 14 2. वही, पृ.- 16 3. दुबे डॉ. श्यामसु ंदर, लोकः परम्परा, पहचान एवं प्रवाह, राधाकृ ष्ट्ि प्रकाशन, प्रथम संस्करि- 2003, पृ. 53 4. मसंह के दारनाथ, प्रमतमनमध कमवताएँ, राजकमल प्रकाशन, पररवमद्धात
संस्करि, 1985 पृ- 99 5. वही – पृ- 99 6. वही – पृ- 99 7. मसंह के दारनाथ, यहाँ से देखो, राधाकृ ष्ट्ि प्रकाशन, मदल्ली, 1999, पृ.- 46 8. प्रसाद गोमवन्द, के दारनाथ मसंह, पचास कमवताएँ, नयी सदी के मलए चयन, वािी प्रकाशन, मदल्ली, 2012, पृ.-30 9. मसंह के दारनाथ, जमीन पक रही है, प्रकाशन संस्थान, पंचम संस्करि, 2012, पृ. 24 10. मसंह के दारनाथ, अकाल में सारस, राजकमल प्रकाशन, दूसरा संस्करि-1990, पुनमु ामद्रत-1996, पृ.- 26 11. मसंह के दारनाथ, यहाँ से देखो, राधाकृ ष्ट्ि प्रकाशन, मदल्ली, 1999,( पानी एक रोशनी है), पृ.-45-46) 12. वही, –( कु छ सवाल अपने आप
से), पृ.- 26 13. वही,( कलाकार से), पृ.- 43 14. वही,( इन्हीं शब्दों में), पृ.- 48 15. वही,( कलाकार से), पृ.- 50-51 16. मसंह के दारनाथ, मेरे समय के शब्द, राधाकृ ष्ट्ि प्रकाशन, 1993, पृ.- 17 17. वही, पृ.- 28
18. मसंह के दारनाथ, जमीन पक रही है, प्रकाशन संस्थान, मदल्ली, पंचम संस्करि- 2012, पृ.-95 19. मसंह के दारनाथ, यहाँ से देखो, राधाकृ ष्ट्ि प्रकाशन, मदल्ली, 1999, पृ.- 35 20. अज्ञेय, संपादक एवं संकलनकताा, तीसरा सप्तक, भारतीय ज्ञानपीठ, 10वां संस्करि, 2005( के दार का वक्तव्य) पृ.- 122 21. वही, पृ.- 123 22. वही, पृ.- 123 23. वही, पृ.- 126 24. मसंह के दारनाथ, अभी मबलकु ल
अभी, राजकमल प्रकाशन, पृ.- 64 25. मसंह के दारनाथ, अभी मबलकु ल अभी, राजकमल प्रकाशन, खोल दू ँ यह आज का मदन नामक कमवता । पृ- 31 26. मसंह के दारनाथ, ताल्सताय और सायमकल, राजकमल प्रकाशन, संस्करि- 2005, पहली आवृमत-2010, पृ.- 18 27. अज्ञेय, संपादक एवं संकलनकताा, तीसरा सप्तक, भारतीय ज्ञानपीठ, 10वां संस्करि, 2005,( दुपहररया), पृ.-130 28. जमीन पक रही है, के दारनाथ मसंह,
माँझी का पुल, पृ. 97 29. अज्ञेय, संपादक एवं संकलनकताा, तीसरा सप्तक, भारतीय ज्ञानपीठ, 10 वां संस्करि, 2005,( के दारनाथ मसंह का वताव्य), पृ.- 124 30. मसंह के दारनाथ, जमीन पक रही है, प्रकाशन संस्थान, मदल्ली, पंचम संस्करि- 2012, पृ.- 46 31. मसंह के दारनाथ, अकाल में सारस, राजकमल प्रकाशन, दूसरा संस्करि-1990, पुनमु ामद्रत-1996, पृ.- 22
Vol. 3, issue 27-29, July-September 2017. वर्ष 3, अंक 27-29 जुलाई-सितंबर 2017