Jankriti International Magazine / जनकृ सत अंतरराष्ट्रीय पसिका ISSN: 2454-2725
धन और संमदनध पू ंजी की वह काली भूममका शुरू हो चुकी है ।” 9 यही वजह है मक सरकार बनने के बाद तरह तरह के घोटालों का मसलमसला शुरू हो जाता है । प्रायः गौर जरूरी मुद्दों पर सरकार संकटग्रस्त होती मदखती है । अपराध का धनत्व इतना बढ़ जाता है मक बड़े-बड़े नेताओं तक की हत्या कर दी जाती है । पॉल गोमरा भी द्रुत गमत से पररवमतात व्यवस्था में देखते हैं मक“ सरकारें बनती और मगर जातीं । कोई प्रधानमंत्री बनता, मफर या तो मगरा मदया जाता या मार मदया जाता । लोगों की स्मृमत उस कै सेट की तरह थी, मजसमें हर रोज नई छमवयां और नई आवाजें टेप की जातीं और रात में उन्हें पोंछ मदया जाता । सुबह वे सबके सब स्मृमतहीन होकर उठते । उन्हें मपछला कु छ याद नहीं रहता ।” 10 स्मृमतहीनता और मवकल्पहीनता के कारि ही राजनीमतक दलों द्वारा वायदा पूरा न करने और धोखे खाने के बाद भी जन सामान्य उन्हीं चुमनंदा भ्रसे नेताओंमें से ही मकसी को चुनने के मलए मववश होता है ।
मौकापरस्ती इस दौर की राजनीमत का चौथा प्रमुख लक्षि है । कई दल और राजनेता अपने मसद्धांतों और आदशों को दरमकनार कर सुमवधानुसार राजनीमतक खेमा बदल लेते हैं । कु छ राजनीमतक चेहरे या छोटे और क्षेत्रीय दल मकसी भी मोचे( चाहे कांग्रेस के नेतृत्व में पहला मोचाा या भाजपा के नेतृत्व में दूसरा मोचाा या गौर कांग्रेस और गौर भाजपाई दलों का तीसरा मोचाा हो) की सरकार में मंत्रीमंडल की शोभा जरूर बढ़ाते हैं । चुनाव के दौरान जो दल एक दूसरे के धुर मवरोधी प्रतीत होते हैं, चुनाव के बाद सरकार गठन में वे एक दूसरे को प्रत्यक्ष या परोक्ष समथान देते मदखाई देते हैं ।‘ और अंत में प्राथाना’ में कोतमा के मवधायक टी पी मसंह मवमध मंत्री हैं, जो संघ के पुराने कायाकत्र्ता हैं । तौमफक अहमद की हत्या के बाद अनुकू ल पोस्टमाटाम ररपोटा मलखवाने के मलए डॉ. वाकिकर
पर दबाव डालने वालों में टी पी मसंह और बड़े अफसरों के अलावा-“ मजले के जाने-माने अपराधी गु ंडू भइया भी मौजूद थे । पाटी बदलकर वे भी इन दल में आ गए थे और टी पी मसंह के दामहने हाथ माने जाते थे ।” 11 आज राजनीमत में गु ंडू भइया जैसे अवसरवादी-अपराधी तत्वों की जमात बढ़ती जा रही है ।
गठबंधन की राजनीमत इस दौर के राजनीमतक परर्टश्य पांचवां प्रधान लक्षि है । मपछले तीन दशकों में वर्षा 2014 के चुनाव के पहले मकसी एक राजनीमत दल को सरकार गठन हेतु पूिा बहुमत नहीं ममला है । इस दौरान सरकार गठन हेतु जो गठबंधन बने उनमें नीमत, मुद्दे और कायाक्रम के प्रमत मवशेर्ष प्रमतबद्धता का मनतांत अभाव था । ऐसी सरकारें भानुमती के कु नबे की तरह कहीं से ईट ं तो कहीं से रोड़ा लेकर बनायी गयीं । गठबंधन की सरकार में शाममल हर दल का क्षेत्रगत, संप्रदायगत, जामतगत, भार्षागत अपना-अपना एजेंडा होता है । ये गठबंधन सशक्त एकता के प्रतीक न होकर, आरंभ से ही अशक्त और अस्थायी रूप में हमारे सामने आते हैं । बार-बार सरकारें मगरती हैं और मध्यावमध चुनाव होते हैं । मवकास की गमत मंथर होने लगती है । पू ंजीपमत घराने इसे अपने ढंग से संचामलत करते मदखाई देते हैं ।‘ पीली छतरी वाली लड़की’ कहानी में सत्ता के शीर्षा पर बौठे मनखलािी द्वारा पावर, आई टी, हेल्थ आमद को प्राइवेट करने की मांग पर प्रधानमंत्री की असहायता साफ झलकता है-“ बस-बस जरा सि करें भाई... बंदा लगा है ड्यूटी पर । मेरा प्राब्लम तो आपको पता है । मखचड़ी सरकार है । सारी दालें एक साथ नहीं गलतीं मनखलािी जी ।” 12 नौमतक मूल्यों के अभाव में तुच्छ मनमहत स्वाथों ने हमारी राजनीमत को मवशृ ंखल बना मदया है । इस संदभा में श्यामाचरि दुबे मलखते हैं-“ आज की राजनीमत में दूरदशी और दूरगामी नीमतयों का अभाव है । तात्कामलक लाभ की ्टमसे से उसमें आसानी से
Vol. 3, issue 27-29, July-September 2017. वर्ष 3, अंक 27-29 जुलाई-सितंबर 2017