Jankriti International Magazine Jankriti Issue 27-29, july-spetember 2017 | страница 283

Jankriti International Magazine / जनकृ सत अंतरराष्ट्रीय पसिका ISSN: 2454-2725
भी तरह का पिाताप उसके मन में नहीं है । जामलब से संबंधों से वामकफ होकर नीना ही अपनी बहन के पास पुिे चली जाती है लेमकन मफर भी जामलब की मजन्दगी में कोई सुधार नहीं होता । मानस की भी मजन्दगी ऐसी ही है । वह भी नशा करता है और शादीशुदा होने के बावजूद अड्डों की तलाश में लगा रहता है । अड्डों पर जाना उसके मलए आमबात है । लड़मकयाँ भी उसकी आदतों से वामकफ होती है जब वह मीना के पास जाता है तो वह जाते ही कहती है“ मैं जानती हूँ तुम इसी तरह आते हो और आते ही दारू माँगते हो । इसमलए मैं हमेशा दारू रखती हूँ ।” 40 नशे के कारि अंत में उसकी मृत्यु भी हो जाती है । रतनसेन भी मपया के साथ चक्कर चलाता रहता है । इस प्रकार स्पष्ठ है मक यह मफ़ल्मी दुमनया की वास्तमवक सच्चाई है मजसमें सभी का नैमतक पतन हो चुका है उनके मलए अनैमतक काया करना आमबात है । पटकथा लेखक हो या संगीत मनदेशक या नायक या अमभनेत्री सभी इस जाल में ऐसे फँ से हुए मक इससे बाहर मनकलना उनके वश की बात नहीं है । इन्हीं चकाचौंध वाली मफ़ल्मी दुमनया की वास्तमवकता का मचत्रि इस उपन्यास में मकया गया है ।
जमसया जैसे लोग मफल्मों में रोल लेने के मलए मफल्म प्रोड्यूसरों के आगे पीछे घूमते रहते हैं । मजसका यथाथा मचत्रि इस उपन्यास में मकया गया है । मफ़ल्मी दुमनया में सब नाम, शोहरत, पैसे के पीछे भागते रहते हैं । सभी में आपसी होड़, अमस्तत्व की तड़प, प्रमतयोमगता और कू टनीमत का चक्र चलता रहता है । मजतना ज्यादा काम करोगें उतने ही अमधक पैसे ममलेंगे । इसी वजह से धीरू की भी मौत हो जाती है । जामलब मफ़ल्मी जगत् की वास्तमवकता के सम्बन्ध में लेखक को बताता है ।“ जैसे यहाँ सब मरते
हैं । सबसे पहली बात रात-मदन काम । अब रात-मदन काम क्यों? तो यार ये‘ इंडस्री’ है ।‘ शीट्स’ होती है मजतना जल्दी काम करोगे उतना पैसा ममलेगा ।” 41 इस मफ़ल्मी दुमनया में सफलता प्राप्त करने के मलए पहले चापलूसी, चाटुकाररता और दूसरों का मोहताज बनने कला सीखनी पड़ती है । मजसकों ये सब काम नहीं आते वह इसमें नहीं मटक सकता । काम की तलाश में आया हुआ लेखक भी मफ़ल्मी जगत् की वास्तमवकता को देखकर मुम्बई छोड़ने को मववश होता है ।
इस प्रकार उपन्यास में असग़र वजाहत ने एक पटकथा लेखक जामलब की मजन्दगी का खुलासा करके मफ़ल्मी दुमनया के प्रत्येक क्षेत्र में कायारत प्रमतष्ठा प्राप्त लोगों की मनकटतम मजन्दगी की सच्ची तस्वीर खींची है । मुम्बई की धूम-मचाती मफ़ल्मी दुमनया के हर एक पहलू को इसमें प्रस्तुत मकया गया है । मफ़ल्मी दुमनया की हकीकत से वास्ता कराना ही इस उपन्यास का मुख्य उद्देश्य है । इसमें मफल्मी दुमनया के लटकों- झटकों के अलावा भी कई ऐसे प्रसंग हैं, जो वहाँ होने वाली घटनाओं को सामने लाते हैं, चमकीली दुमनया के काले सच को उघाड़ते हैं । जैसे जामलब के घर पर जब शकु न और मनोहर कब्ज़ा करने की सोचते हैं तो वह मकस तरह अंडरवल्डा का सहारा लेता है । इसके अलावा प्रोड्यूसर से पैसे वसूलने के मलए अंडरवल्डा की मदद ली जाती है, इसकी ओर भी उपन्यास में संके त मकया गया है । यह उपन्यास साधारि भार्षा में मफ़ल्मी जीवन और जगत् के जमटल संबंधों को उजागर करता है । मानवमन की गहराईयों में उतर कर कलात्मक तरीके से पात्रों और उनकी गमतमवमधयों का उद्घाटन करता है ।
िंदभक ग्रन्द्थ िूची:-
Vol. 3, issue 27-29, July-September 2017. वर्ष 3, अंक 27-29 जुलाई-सितंबर 2017