Feb 2026_DA | Page 38

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उसे गुरिल्ला युधि में परारंगत बनरायरा । इसी वजह से वह 12 विगों तक प्िरा नहीं जरा स्रा । ्टं्टयरा चीते की फरूतत्म के सराथ अंग्रेजी सैनय िरावनियों में घुसकर उन्रा खजरानरा लदू्ट लियरा करतरा थरा । फरूतत्म इतनी कि अंग्रेज मरानने लगे कि एक नहीं चरार ्टं्टयरा हैं जो एक ही समय में चरार स्थानों पर खजराने लदू्ट लेते हैं । लदू्टे गये खजराने की अंतिम पराई तक गरीबों और जरूरतमंदों को दे दी जराती थी । इसीलिये ्टं्टयरा भील की गिरफ्तारी की खबर प्मुखतरा से 10 नवंबर, न्यूयॉर्क ्टराइमस, 1889 के अंक में प्रकाशित हुयी जिसमें उनिें भरारत के रॉबिन हुड के रूप में वर्णित कियरा गयरा थरा । पुलिस ने मुखबिरी के चलते जरालसराजी से उसे गिरफ्तार कर लियरा । मुखबिर को तो ्टं्टयरा ने मरार िरालरा । सखत पुलिस पहरे और भरारी लोहे की जंजीरों से बरांधकर जबलपुर की जेल में उसपर अमरानवीय अत्याचरार किये गये । सत्र न्यायरालय, जबलपुर, ने 19 अक्टूबर 1889 के दिन फरांसी की सजरा सुनराई और 4 दिसंबर को फरांसी दे दी गयी । अंग्रेंजों ने भयवश फरांसी के बरा् वीर बतल्रानी ्टं्टयरा के शव को चुपके से ररात के अंधेरे में इंदौर के मिदू कसबे के जंगलों में खंडवरा रेल मरार्ग पर परातरालपरानी रेलवे स्टेशन के परास फेंक दियरा । वहीं उसकी समरातध मंदिर है जिरां आज भी सभी रेल चरालक रूक कर उसे श्रध्दासुमन अर्पित करते हैं ।
3. गोविन्द गुरु और मानगढ़ के शहीद
गुजररात से आकर रराजपुतरानरा की डूंगरपुर स्टे्ट के रराँव बिेसरा( बंसियरा) में बसे बंजराररा परिवरार में 20 दिसमबर 1858 को एक बरालक पै्रा हुवरा जिस्रा नराम गोविं्रा रखरा गयरा । अपनी छो्टी उम्र में ही गोविं्रा इदर, परालनपुर, सिरोही, प्तरापरढ़, मंदसोर, मरालवरा और मवरा् के ्दूर तक रराँवो में घदूम घदूम कर गोविं्रा ने आदिवरातसयों को बेहद निर्धन गरीब िरालत को देखरा । तो उसके मन में समराज सुधरार की भरावनरा जरारृत हुई । उसी ्राल में रराजस्थान में प्वरास कर रहे आर्यसमराज के प्वर्तक एवं वेदों के मिरातवविरान स्वामी दयरानन् से उनकी भें्ट हुई । स्वामी
दयरानन् के आदेशरानुसरार उनिोंने उनके समीप रहकर उनिोंने यज्-हवन एवं वेदों की तशक्षरा प्रापत की । स्वामी दयरानन् ्रा उद्ेशय उनके मराधयम से बंजराररा कुरीतियों, पराखंडों और नशे आदि अनधतवश्वास में फंसरा हुआ थरा । उसे छुड़वरा्र उनमें जराग्रति लरानरा थरा । बंजराररा समराज में उनिें अपनरा गुरु बनरायरा गयरा । तब से उन्रा नराम गोविन् गिरी हुवरा । आपने बंजराररा समराज में समराज सुधरार ्रा ्राय्म आरमभ कियरा जो अंग्रेजों को नहीं सुिरायरा । अंग्रेज भरारतीयों को तपििरा और पीड़ित ही रखनरा चरािते थे । उनिें अनेक प्रकार से रोकने की कोशिशे की गई । आदिवरासी रराजस्थान मेँ डूँगरपुर, बराँसवरािरा और गुजररात सीमरा से लगे पँचरायतसमिति रराँव भुकियरा
( वर्तमरान आनन्पुरी) से 7 किलोमी्टर ्दूर ग्रराम पँचरायत आमदररा के परास मरानरढ़ पहाड़ी पर 17 नवमबर, 1913( मरार्ग शीर्ष शुक्ला पदूतण्ममरा वि. स. 1970) को गोविन् गुरू ्रा जनमत्न बनराने के लिए बंजराररा वनवरासी समराज एकत्र हुआ । अंग्रेजों ने इसे रराजद्ोि ्रा बिरानरा बनरा्र मरानगढ़ के पिरािी को घेर लियरा । गोविन् गुरु विरां यज्, हवन एवं धमवोपदेश करने के लिए आये थे । अंग्रेज कर्नल शै्टन्म की अगुवराई में निहतथे बंजरारों पर गोलीबरारी कर जनसंिरार को अंजराम दियरा गयरा । मरानरढ़ पहाड़ी पर विदेशी हु्रूमत के इशरारे पर गोविन् गुरु के नेतृतव में जमरा देशभकत सपदूत गुरुभकतों पर तोपों और
बं्दू्ों की गोलियों से किए गए हमले के बरा् मरानरढ़ की पहाड़ी के रकतस्नान के मंजर ्रा वर्णन रोंर्टे खड़़े करतरा है । सर्रारी आं्िो के अनुसरार 1503 आदिवरासी शहीद हुए । कुछ अनय सदूत्रों के अनुसरार यह संख्या बहुत अधिक थी । गोविन् गुरु व उनके शिषयों को गिरफ्तार कर लियरा गयरा । उनको फरांसी की सजरा सुनराई गई लेकिन संभरातवत जनविद्ोि को देखते हुए बीस सराल की सजरा में बदल दियरा गयरा । उच्च न्यायरालय में अपिल पर यह अवधि 10 वर्ष की गई । लेकिन बरा् मे 1920 में ररिरा कर उन पर सुँथररामपुर( संतररामपुर), बरांसवरािरा, डुँगरपुर एवं कुशलरढ़ रियरासतों में प्वेश पर प्तिबनध लररा दियरा गयरा । मरानगढ़ की घ्टनरा को रराजस्थान
्रा जलियरांवरालरा बरार भी ्िरा जरातरा है ।
अंग्रेजों के अत्याचरारों के ये केवल तीन प्चलित ऐततिरातस् घ्टनराएँ हैं । ऐसे हज़रारों सुनी और अनसुनी घ्टनराएं इततिरास के गर्भ में सुरक्षित हैं । अंग्रेजों ने सभी पर अत्याचरार कियरा । जिन पर अत्याचरार हुआ वो ब्राह्मण यरा दलित यरा आदिवरासी नहीं थे अपितु भरारतीय थे । वो सभी अपने थे और अंग्रेज परराये अत्याचरारी शरासक थे । आप इस सतय इततिरास को कभी बदल नहीं सकते । इन तथयों की अनदेखी कर अंग्रेजों को श्रेष्ठ और अपने रराजराओं को तन्कृष्ट बतराने वराले इन अवसरवरा्ी रराजनीतिज्ों को आप केवल देश-विरोधी नहीं तो क्या कहेंगे । �
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