Feb 2026_DA | Seite 17

संस्कृति में हुई अवनति के रूप में देखरा गयरा । 2014 में केंद् में सर्रार बनराने वराले प्धरानमंत्री नरेंद् मोदी के ्राय्म्राल के दौररान भरारतीय समराज में जरातिगत विषमतराओं को ्दूर करने के लिए उ्ठराए गए कदमों ने जिरां हिन्दू समराज के एकीकरण की प्तक्रयरा को पुष्ट कियरा, वहीं समराज में बढ़ती समरसतरा की नई चेतनरा ने विशव सतर पर भरारत की गरिमरा को बढ़राने ्रा ्राय्म कियराI
भरारतीय समराज में समरसतरा की व्यापक होती चेतनरा और हिन्दू धर्म, संस्कृति एवं मूल्यों
पर बढ़ती आस्था और विश्वास के बीच देश के उच्च शिक्षण संस्थानों में कथित जरातिगत भेदभराव पर अंकुश लरराने के लिए विशवतवद्यालय अनु्रान आयोग( यदूजीसी) द्वाररा लरायरा गयरा नयरा अधिनियम विवरा् ्रा बिरा विषय बन गयरा है । विवरा् इसलिए हो रिरा है कि तशक्षरा सथलों में अगर ऐसे ्रानदून लरारदू किए जराते हैं तो इससे सभी के लिए न्याय सुतनसशचत करने वराली एक निषपक्ष वयवस्था बनने के बजराए सरामरातज् ्दूरियों को बढ़रावरा मिलेररा, जिस्रा परिणराम अंततः पदूरे समराज में न्राररातम् ही
होररा । सराथ ही तशक्षरा संस्थानों में ऐसे ्रानदूनों ्रा प्योग अपने हितों की पदूतत्म के लिए के लिए किए जराने की आशं्रा से इं्रार नहीं कियरा जरा सकतरा, कयोंकि इस समबनध में कोई सपष्ट प्रावधरान ्रानदून में नहीं है । नए अधिनियमों के विरोध में देश भर में हुई कड़ी प्तिक्रियरा के बीच उच्चतम न्यायरालय ने यदूजीसी के नए ्रानदून पर रोक लररा दी है । उच्चतम न्यायरालय ने अपनी त्टपपणी में ्िरा है कि नयरा अधिनियम प्थम दृष्टयरा असपष्ट प्तीत होतरा है और इन्रा दुरुपयोग किए जराने की आशं्रा है । अगर इस
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