eMag_March 2021_Dalit Andolan | Page 17

ब्ाह्मण वर्ग में शामिल करने की मांग करने लगे । कुछ जातियों को क्मत्र एवं वै्र साबित करने के लिए प्रयास होने लगे । यह जाति के आधार पर श्े्ठता तय करने का दौर था । मनचिली कही जाने वाली जातियों के कई लोग ऊंचिी जाति के रसम रिवाज अपनाकर खुद के उच्च जाति का होने का दावा भी करने लगे । वे इस तरह से सामाजिक रुतबा बढ़ाना चिाहते
थे । वंमचित समूह के नेताओं का मानना है कि जातिगत जनगणना के जो पुराने आंकड़े हैं , वे भ्ामक हैं । जाति किसी समूह के पिछड़ेपन की निशानी है । पिछड़े वर्ग के नेताओं का कहना है कि देश में उनकी आबादी करीब 60 फीसद है । जाहिर है कि यदि जातियों के सही आंकड़े सामने आते हैं तो देश एक बड़े राजनीतिक बदलाव का गवाह बन सकता है , पर इस तर्क को अनदेखा न किया जाए कि जब देश में
पशुओं की गणना होती है तो फिर इंसानों की जातिगत जनगणना से परहेज ्रों होना चिाहिए ?
मंडल आयोग ने तो गैर-हिंदू समुदायों में भी पिछड़ी जातियों का िगटीकरण किया है , जिसके कारण कई मुशसलम , सिख और ईसाई समुदायों को पिछड़े वर्ग में शामिल कर उनहें भी आरक्ण की श्ेणी में शामिल किया गया ।
रद्मप सैद्धांतिक तौर पर जाति प्रथा केवल हिंदू धर्म में है , लेकिन वरिहार में भारत के सभी गैर हिंदू समुदायों को भी जाति प्रथा ने जकड़ रखा है । इसलिए धर्म परिवर्तन कर लेने के बाद भी वे सामाजिक पदानुक्रम और सतरण की अवधारणा से मु्त नहीं हो पाते ।
नीतीश कुमार के एक अनर सुझाव पर भी काफी प्रतिक्रिया हुई है । उनहोंने बिहार सरकार की तर्ज पर केंद्र को भी आरक्ण के लिए कर्पूरी
िलॉमू्यले पर अमल करने का सुझाव दिया है । फिलहाल केंद्र सरकार द्ारा अति पिछड़ों के लिए आरक्ण के भीतर आरक्ण नहीं दिया गया है । बिहार में ओबीसी कोटिे में कोटिा 1978 से लागू है । बिहार के मुखरमंत्ी रहते हुए कर्पूरी ठाकुर ने मुंगेरीलाल कमीशन की रपटि लागू कर 12 प्रतिशत कोटिा अति पिछड़ों के लिए लागू किया था , जिसका बड़ा विरोध उनहीं की जनता पार्टी ने किया । इसके कारण कर्पूरी को मुखरमंत्ी पद गंवाना पड़ा ।
जातिगत जनगणना कराने की नीतीश कुमार की मांग का सिागत करते हुए अति पिछड़ा वर्ग आयोग के अधरक् भगवान लाल साहनी ने सैद्धांतिक रूप से जस्टिस रोहिणी की अनुशंसा को लागू करने की आि्रकता बताई है । दरअसल राजग सरकार द्ारा अक्टूबर 2017 में रोहिणी आयोग का गठन किया गया था । इसका मुखर उद्े्र अति पिछड़े वर्ग के अंतर्गत सामाजिक नरार सुनिश्चित करना है । ओबीसी में मौजूदा जातियों को उपिगटीकृत करने के लिए इसका गठन किया गया है , ताकि सरकारी नौकरियों और शैक्मणक संसथानों में अवसरों के अधिक नरारसंगत वितरण को सुनिश्चित किया जा सके ।
रद्मप आधिकारिक तौर पर रोहिणी आयोग की रपटि प्रकाशित नहीं हो पाई है , मगर कहा जा रहा है कि उसमें ओबीसी कोटिे को चिार भागों में बांटिने की संसतुमत की गई है । आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांचि िषयों में ओबीसी की 2,633 जातियों में दस जाति समूह को कोटिे का 25 फीसद लाभ मिला है । 37 जाति समूहों को 67 फीसद तो 100 जाति समूहों को कोटिे का 75 फीसद लाभ पहुंचिा है । 2,486 जाति समूह ऐसे रहे , जिनहें मात् 25 फीसद लाभ मिल सका है । 1,000 जाति समूह तो ऐसे भी रहे जिनहें ओबीसी आरक्ण से एक फीसद लाभ नहीं मिला । इससे नई किसम की असमानता पैदा हो रही है । ऐसे में इन िगयों को रोहिणी आयोग की रपटि का बेसब्ी से इंतजार है ।
( लेखक राजनरीवतक दल जदयू के प्रधान महासचिव हैं / साभार ) ekpZ 2021 Qd » f ° f AfaQû » f ³ f ´ fdÂfIYf 17