प्रश्न पर अब कोई समझौता करने के लिए तैयार नहीं है । आगामी विधानसभा चिुनाव के परिणाम राजर में बदलाव की नयी कहानी लिखेंगे , ऐसा सप्टि रूप से दिखने लगा है ।
पुडुचेरी में खिलेगा भगवा
केंद्र शासित प्रदेश पुडुचिेरी में फरवरी माह में कांग्रेस की सरकार का पतन हो गया । 30 सदसरों वाली विधानसभा में बीजेपी गठबंधन अपनी सरकार बनाने जा रही है । अगर पुडुचिेरी में भाजपा सत्ा में आती है तो दमक्ण के इस राजर में वो पहली बार सरकार बनाएगी और दमक्ण भारत मे पार्टी के पांव और मजबूती से जमेंगे . 2001 की जनगणना के अनुसार , पलॉशनडचिेरी की कुल जनसंखरा 974,345 है , इसमें से , 157,771 ( 16.2 प्रतिशत ) अनुसूमचित जाति ( एससी ) हैं । 1991-2001 के दशक में दलित जनसंखरा की वृद्धि दर 20.2 प्रतिशत रही । दलित आबादी का 44.0 प्रतिशत शहरी क्ेत्ों में रहता है । लेकिन गौर करने लायक बात यह है कि पिछले कई दशकों के दौरान चिचि्य और चिचि्य की गतिविधियों का सर्वाधिक नकारातमक परिणाम दलित वर्ग को भी भुगतना पड़ा है । राजर में दलितों की बड़ी आबादी धर्म परिवर्तन करके ईसाई बन चिुकी है । ईसाई बनने वाले दलितों को चिचि्य की ओर से बड़े-बड़े सपने दिखाए गए थे , लेकिन वह सपने कभी नहीं पूरे हो सके । इसके विपरीत पिछले छह वर्ष के दौरान मोदी सरकार के विकास कारयों का लाभ पुडुचिेरी में रहने वाले दलित , गरीब और वंमचित वर्ग को मिला है , उससे केंद्र शासित राजर में भाजपा का जनाधार
बढ़ा है । भाजपा के प्रति दलित , गरीब और वंमचित वर्ग की बढ़ती आसथा और वि्िास के कारण अबकी बार सत्ा परिवर्तन होना सुनिश्चित हो गया है । पिछले पांचि वर्ष के दौरान राजर में मोदी सरकार के विकास कारयों को सप्टि रूप से देखा जा सकता है ।
पूर्व प्रधानमंत्ी अटिल बिहारी बाजपेई के बाद देश में फिर से बनी भाजपा की नयी सरकार के मुखिया माने प्रधानमंत्ी नरेंद्र मोदी ने विकास के लिए अपना जो रोड मैप सामने रखा था , उस रोड मैप का परिणाम छह वर्ष बाद पूरे देश की बदल रही तसिीर के रूप में देखा जा सकता है । पिछले छह िषयों के कार्यकाल में मोदी सरकार ने चिुनाव नजदीक देखकर कभी दलितों के प्रति प्रेम नहीं दिखाया , बशलक उनहोंने तो सत्ा संभालने के साथ ही समाज के पिछड़े वर्ग के लिए कार्य करना शुरू कर दिया था । आज शायद उसी प्रतिबद्धता का नतीजा है कि अगर हम आकड़ों से मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल को निकाल भी दें तो भी इतनी योजना बचिती हैं- जो यह बताती हैं कि दलित उतथान के लिए मोदी सरकार के प्रयास कैसे 70 सालों की दिखािटिी कोशिशों पर भारी हैं । सबका साथ सबका विकास के मूलमंत् के साथ मोदी सरकार ने साल 2014 में चिुनाव जीतने के
साथ ही इस पर काम करना शुरू किया और सुनिश्चित किया कि ये योजनाएँ केवल दसतािेजों में लागू न हों , बशलक जमीनी सतर पर इनका फायदा समाज के पिछड़े समुदाय को मिले ।
विरोधियों के कथित आरोपों पर धरान देने की जगह मोदी सरकार लगातार अपना काम कर रही है । मोदी सरकार का लक्र दलितों को समाज औऱ विकास की राह में सबसे आगे रखने का है औऱ इसके लिए सरकार काम भी कर रही है । आलोचिना औऱ सराहना पर धरान देने के सथान पर मोदी सरकार का लक्र गरीब-दलित जनता को विकास की मुखर धारा से जोड़ने का है , जिससे वह भी देश के साथ कदम से कदम मिलकर चिल सकें । एक बार फिर पांचि राजरों के विधानसभा होने जा रहे हैं । भाजपा का लक्र सिर्फ सत्ा का हासिल करके सरकार चिलना मात् नहीं है , बशलक भाजपा पिछले 70 िषयों से विकास से दूर रही जनता , विशेषकर दलित , गरीब , पिछड़े और वंमचित वर्ग की जनता का समग्र विकास करने के लिए प्रतिबद्ध है । यही कारण है कि पांचिों राजरों में रहने वाली गरीब , दलित और वंमचित जनता भाजपा की सरकार का गठन करने के लिए सबसे आगे नजर आ रही है । �
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