eMag_June 2026_DA | Page 33

पदक्रम को माना ग्या । लेकिन ्यह सिद्धांत अंतिम निषकर्ष को नहीं व्याख्याल्यत अथ्वा सत्यापित करता । सिद्धांत में सम्य और शोध के साथ परर्वत्षन और परिषकरण भरी होता रहता है ।
‘ अनुसूचित जाति और जनजाति: कल्याणकाररी ्योजनाएं और संरक्षण’ पर ल्वसतार करने से पहले हमें ्यह लचलनित करना होगा कि आखिर अनुसूचित जाति और जनजाति किसे कहते हैं, भारतरी्य संल्वधान में इनके लिए क्या प्रा्वधान हैं और इनकरी क्या परिभाषा हैं, इनकरी अपनरी पहचान के मानक क्या है अन्य समुदा्यों से ्यह कैसे अलग-थलग हैं, इनकरी ल्वशेषताएं क्या हैं, इनके बरीच क्या-क्या समानताएं और ल्वलभन्नताएं हैं?
अनुसूचित जनजाति और जाति का अध्य्यन
मान्वशासत्री्य और समाजशासत्री्य दृसषटकोण के महत्व का रहा है तो ऐसे में ्यह देखना जरूररी हो जाता है कि इन ल्वर्यों में क्या कुछ लिखा और पढ़ा ग्या । जहां तक अनुसूचित जनजाति के प्रश्न और पहचान का स्वाल हैं तो मान्वशासत्री मजूमदार लिखते हैं कि-“ एक जनजाति परर्वारों अथ्वा परर्वारों के समूह का संग्रह है जिसका एक सामान्य नाम, एक सामान्य भू-भाग, एक सामान्य भाषा और ल्व्वाह, ्वृलत् ्या व्य्वसा्य के प्रति कुछ निषेध का पालन, उनमें परसपर आदान-प्रदान ए्वं दाल्यत्वों करी पारसपरिकता करी एक सुलनसशचत व्य्वसथा ल्वकसित हो गई ।” 1991 करी जनगणना आलद्वालस्यों के बारे में बतलातरी है कि ्यह अपने सरीलमत संसाधनों से के्वल जरील्वत रहना हरी सरीख सके हैं और आज भरी ल्वज्ञान करी इस
चकाचौंध ए्वं सभ्यता करी होड से अपरिचित हैं । ऐसे हरी अपरिचित लोगों का उललेख भारतरी्य संल्वधान में अनुसूचित आदिम-जाति ्या जनजाति के अंतर्गत लक्या जाता हैं ।
ऐसे में जो मुख्य ल्वशेषताएं और ल्वलभन्नताएं जनजालत्यों के बारे में निकल कर आतरी हैं, ्वह कुछ इस प्रकार हो सकतरी हैं- प्रत्येक जनजाति करी एक भाषा अथ्वा बोलरी होतरी है, उसके समूह का अपना एक नाम होता है, उनका एक लनसशचत भू-भाग होता है, एक संस्कृति होतरी है, परर्वारों का एक समूह होता है, नातेदाररी करी एक व्य्वसथा, अपना एक राजनरीलतक संग्ठन, आर्थिक आतमलनभ्षरता, अंतल्व्ष्वाहरी व्य्वसथा और एक सामान्य निषेध । इसरी आधार पर हम जनजालत्यों ल्वशलेरण और पहचान करते हैं ।
भारत में प्रजातरी्य अध्य्यन का आरमभ 1890
twu 2026 33