अवैध धर्मांतरण रोकना एवं धर्मांतरितों की डी-लिस्टिंग आवश्यक iz
संपादकीय
अवैध धर्मांतरण रोकना एवं धर्मांतरितों की डी-लिस्टिंग आवश्यक iz
धानमंत्री नरेंद्र मोदरी के नेतृत्व ्वालरी केंद्र सरकार ने गत 26 मई को अपने बारह ्वर्ष पूरे कर लिए । गुजरात के पू्व्ष मुख्यमंत्री ए्वं भाजपा के ्वरिष्ठ नेता नरेंद्र मोदरी ने पहलरी बार 26 मई 2014 को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लरी थरी । उनके नेतृत्व में भारत करी समग्र प्रगति करी धमक से पूरा ल्वश्व गुंजा्यमान है । मोदरी सरकार के बारह ्वर्ष पूरे होने के ्ठरीक पहले, राजधानरी दिल्ली में पहलरी बार जनजाति सांस्कृतिक समागम का आ्योजन लक्या ग्या । समागम में देश के ल्वलभन्न राज्यों में लन्वास करने ्वालरी पांच सौ पचास से अधिक जनजालत्यों के डेढ़ लाख से अधिक लोग पहुंचे, जिनकरी उपससथलत ए्वं परमपराओं को दिललरी्वालस्यों ने भरी निकट से देखा और जाना ।
भारत करी स्वतंत्ता के 78 ्वर्ष बाद पहलरी बार राजधानरी दिल्ली के लाल किला मैदान में आ्योजित ' जनजाति सांस्कृतक समागम ' भग्वान बिरसा मुंडा करी 150्वीं ज्यंतरी ्वर्ष को समर्पित रहा । अपनरी-अपनरी पारमपरिक ्वेशभूषा में समागम के लिए जुटे जनजातरी्य समाज ने अपने अधिकारों, के साथ हरी जनजातरी्य सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण ए्वं जल-जंगल-भूमि से जुडे मुद्ों को सामने रखा । समागम में जनजातरी्य समाज ने केंद्र सरकार से मुख्य रूप से अ्वैध धर्मानतरण को रोकने ए्वं डरी-लिस्टिंग जैसे सं्वेदनशरील, लेकिन गंभरीर मुद्े पर ्ठोस कदम उ्ठाने करी मांग करी । ्यह दोनों मांगें इसलिए सं्वेदनशरील हैं क्योंकि प्रककृलत करी गोद में प्या्ष्वरण अनुकूल जरी्वन्यापन करने ्वाले जनजातरी्य समाज के लिए अ्वैध धर्मानतरण, जहां उनकरी सनातन सांस्कृतिक पहचान ए्वं भारतरी्य स्वदेशरी परमपराओं को नषट करने का कारण बन चुका है, ्वहरी डरी-लिस्टिंग करी मांग जनजातरी्य समाज के अधिकारों का संरक्षण करने के उद्ेश्य से करी जा रहरी है ।
भारत के जनजातरी्य समाज के इतिहास पर दृसषट डाले तो प्राचरीन काल में कुछ जनजालत्यां हरी ्वनों में लन्वास करतरी थरी, जो प्रककृलत अनुकूल जरी्वन्यापन करते हुए ्वनों, पेड़-पौधों, ्वनस्पतियों सहित अन्य प्राककृलतक ्वन सामलग्र्यों के संरक्षण का का्य्ष सलद्यों से करतरी आ रहरी हैं । मध्यकाल में भारत में घुसकर देश करी अधिकांश सत्ा पर बलपू्व्षक अतिक्रमण करने ्वाले ल्वदेशरी मुससलम आक्रांताओं ने जब धर्माभिमानरी हिनदुओं पर अत्याचार करते हुए अ्वैध धमाांतरण करी मुहिम छेड़ दरी और बलप्र्योग करके हिनदुओं को इसलाम स्वरीकार करने के लिए बाध्य कर लद्या । मुससलम आक्रांताओं के बलप्र्योग, प्रताड़ना ए्वं अत्याचारों के बाद भरी जिन हिनदुओं ने इसलाम स्वरीकार नहीं लक्या, उनहें अस्वचछ, अपा्वन ए्वं ्वृलत् के ल्वरुद्ध गंदे कार्यों को करने के लिए बाध्य लक्या ग्या, जो दमन, दलन ए्वं उत्पीड़न के उपरांत अपने मूल समाज के लिए अछूत अर्थात दलित बन गए । लेकिन मुससलम उत्पीड़न के बरीच हिनदुओं का जो ्वग्ष जंगलों के अंदर भाग ग्या और ्वहां रहकर मुससलम आक्रांताओं को चुनौतरी देने का का्य्ष लक्या, ्वह ्वग्ष शनैः-शनैः सम्य परर्वत्षन के साथ ्वनों में लन्वास करने ्वालरी मूल जनजालत्यों के साथ घुल-मिलकर जनजातरी्य समाज में ससममलित हो ग्या, जिनका धर्मानतरण करने में मुससलम शासक असफल सिद्ध हुए ।
भारत में लरिटिश सत्ा आने के बाद अंग्रेजों करी गिद्ध दृसषट जब ्वन क्षेत्ों में लन्वास करने ्वाले जनजातरी्य समाज पर पडरी, उसके बाद जनजातरी्य समाज पर संकट के बादल छाने लगे । 1800 के दशक में लरिटिश शासन के दौरान ईसाई मिशनरर्यों ने सुलन्योजित रूप से ्वनों में प्र्वेश लक्या और कई राज्यों के ्वन क्षेत्ों में कथित रूप से शिक्षा, असपताल और राहत कार्यों करी आड़ में सुलन्योजित रूप से जनजातरी्य लोगों का अ्वैध धमाांतरण कराने में लिपत
हो गईं । मिशनरर्यों के काले कारनामों ए्वं अ्वैध धर्मानतरण कराकर सनातन धर्म को नषट करना का कड़ा प्रतिकार स्व्यं भग्वान बिरसा मुंडा ने भरी लक्या ।
बाद में ईसाई मिशनरर्यों के अ्वैध धर्मानतरण खेल में मुससलम तंत् भरी जुड़ ग्या, जिसका नकारातमक परिणाम जनजातरी्य क्षेत्ों ने रहने ्वाले लोग भुगतने को बाध्य हो गए हैं । ईसाई ए्वं मुससलम तंत् द्ारा सुलन्योजित रूप से कराए जाने ्वाले अ्वैध धर्म परर्वत्षन को रोकने के लिए कई कानून लागू किए गए, लेकिन ्यह कानून भरी बेअसर सिद्ध हुए । गैर- कानूनरी ढिंग से सरकाररी संसाधनों पर मतांतरित लोगों करी बढ़तरी पकड़ के ल्वरुद्ध जनजातरी्य क्षेत्ों में डरी- लिस्टिंग करी मांग अर्थात अ्वैध रूप से धमाांतरित लोगों को अनुसूचित जनजाति करी सूचरी और आरक्षण दा्यरे से बाहर करने करी मांग दशकों से उ्ठाई जा रहरी है ।
अ्वैध धर्मानतरण के कारण देश के कई हिससों में हुए अप्रत्याशित जनसांख्यिकरी्य परर्वत्षन से उतपन्न हुई गंभरीर परिस्थितियों को देखा जा सकता है । कई राज्यों के जनजातरी्य क्षेत्ों में हुए जनसांख्यिकरी्य परर्वत्षन में अ्वैध धमाांतरण के साथ हरी घुसपैल्ठ्यों करी भरी बडरी भूमिका है । इससे समबंलधत तंत् को नषट करने के लिए केंद्र सरकार ने एक उच्चसतररी्य कमेटरी का ग्ठन कर लद्या है, जो राषट्री्य सुरक्षा, कानून व्य्वसथा, सामाजिक संरचना में गंभरीर बदला्व और जनजातरी्य समाज के संरक्षण से जुड़ी समस्या का व्यापक मूल्यांकन करने के बाद सुलन्योजित और सम्यबद्ध समाधान प्रसतुत करेगरी । इसके साथ हरी ्वन क्षेत्ों में रहने ्वाले सनातनरी जनजातरी्य समाज करी चिंताओं को समझ कर ऐसे ्ठोस कदम उ्ठाने करी प्रबल आ्वश्यकता है, जो उनके अधिकारों, सनातनरी सांस्कृतिक पहचान ए्वं जल-जंगल-भूमि से जुडरी समस्याओं का समाधान करने में सक्षम हो सके । �
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