और राषट्पति द्रौपदरी मुर् मू से भेंट कर चर्चा करी । उनके द्ारा प्रसतुत मांगों को सरकार ने अपना समर्थन लद्या है । ्यह आ्योजन जनजातरी्य अससतत्व और सांस्कृतिक राषट््वाद के प्रतरीक के रूप में इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो ग्या है ।
पुनर्जागरण का विराट शंखनाद
्यह के्वल एक का्य्षक्रम नहीं था, बसलक प्राचरीन संस्कृति के रक्षकों— अनुसूचित जनजातरी्य समाज— के स्वाभिमान और आसथा के पुनर्जागरण का ल्वराट उदघोर था । केंद्ररी्य गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि स्वतंत्ता के पशचात पहलरी बार ्वन्वासरी आंदोलनों के इस कुंभ में 550 से अधिक जनजातरी्य समूहों के
लाखों प्रतिनिधि, संत, सामाजिक का्य्षकर्ता, मातृशसकत और ्यु्वा एक मंच पर आए हैं । इसकरी तुलना 150 ्वर्ष पू्व्ष भग्वान बिरसा मुंडा द्ारा छेडे गए ' उलगुलान '( क्रांति) से करी जा सकतरी है ।
एकता में विविधता का भवय दर्शन
अखिल भारतरी्य ्वन्वासरी कल्याण आश्म और अन्य सह्योगरी संग्ठनों के नेतृत्व में हुए इस आ्योजन ने दिल्ली और पूररी दुलन्या को भारत करी ल्वल्वधता के दर्शन कराए । अरुणाचल प्रदेश से लेकर दक्षिण के ्वा्यनाड तक, और राजसथान के मरुसथल से लेकर मध्य भारत के रे्वा तट तक, 40 प्रांतों के 300 से अधिक जिलों से जनजातरी्य समाज अपनरी पारंपरिक ्वेशभूषा, लोकगरीतों और ्वाद्य्यंत्ों के साथ लाल किले के प्रांगण में एकलत्त हुआ ।
्यह आ्योजन पिछले 20 वर्षों से चल रहे ' सडक से संसद तक ' जन जागरण आंदोलन का परिणाम है । ्यह के्वल अधिकारों करी लडाई नहीं, बसलक प्रलोभनों और धमाांतरण के प्र्यासों के बा्वजूद अपनरी सनातन संस्कृति को सुरक्षित रखने ्वाले जनजातरी्य समाज के धै्य्ष का सममान है । जल, जंगल, जमरीन और प्रककृलत के साथ उनका सामंजस्यपूर्ण जरी्वन आज पूररी दुलन्या के लिए एक सरीख है ।
सरकार की प्दतबद्धता
गृह मंत्री अमित शाह ने सपषट लक्या कि " ्वन्वासरी समाज भारतरी्य संस्कृति करी आतमा है ।" उनहोंने स्वतंत्ता संग्राम में उनके ्योगदान करी सराहना करते हुए कहा कि ्वत्षमान सरकार जनजातरी्य समाज के सममान, ' रोटरी, कपडा, मकान, शिक्षा, चिकितसा और रोजगार ' के साथ- साथ उनकरी सांस्कृतिक पहचान को खंडित करने ्वालरी साजिशों के खिलाफ ्ठोस कदम उ्ठाने के लिए प्रतिबद्ध है ।
मातृशक्त का नेतृतव इस समागम करी एक बड़ी ल्वशेषता शोभा्यात्ा
में महिलाओं और ्यु्वाओं करी भाररी भागरीदाररी रहरी । दिल्ली करी तपतरी धूप में भरी सांस्कृतिक प्रतरीकों के साथ उनका उतसाह देखने ला्यक था । ्यह इस बात का प्रमाण है कि दुर्गम क्षेत्ों में आज भरी महिलाओं के कारण हरी जनजातरी्य ल्वरासत जरील्वत है । उनकरी सुरक्षित और सलक्र्य भागरीदाररी संदेश देतरी है कि भारत का सांस्कृतिक पुनर्जागरण महिलाओं के नेतृत्व में हरी संभ्व है ।
प्मुख मांगें और विचारधारा
जनजातरी्य नेताओं ने सपषट लक्या कि ल्वकास का अर्थ के्वल ' शहररीकरण ' नहीं है, बसलक प्रककृलत और परंपराओं के साथ रहकर अपनरी जडों से जुडे रहना है । उनहोंने सरकार से मांग करी कि भोले-भाले जनजातरी्य लोगों का धमाांतरण करने ्वालों के ल्वरुद्ध कडा कानून बना्या जाए ताकि उनके आरक्षण और अधिकारों का संरक्षण हो सके । मंच से गूंजते " तू-मैं एक रकत " और " नगर्वासरी, ग्राम्वासरी, ्वन्वासरी- हम सब भारत्वासरी " जैसे नारों ने सिद्ध लक्या कि जनजातरी्य समाज मुख्यधारा से कटा हुआ नहीं है, बसलक सनातन धर्म और राषट्लनष्ठा करी मुख्यधारा का अभिन्न हिससा है ।
सांस्ककृतिक एकातमता का भविषय
्यह आ्योजन कोई एक दिन का चमतकार नहीं था, बसलक 2006 से जाररी सतत संग्ठनातमक का्य्ष का परिणाम था । लाखों करी संख्या में आए जनजातरी्य समाज ने स्व्यं अपना टिकट खररीदकर और अनुशासित रहकर जो प्रदर्शन लक्या, ्वह रेल्वे प्रशासन और समाज के लिए भरी ल्वस्मयकाररी था ।
अंततः, ' सांस्कृतिक समागम 2026 ' ने ्यह सपषट संदेश लद्या है कि जनजातरी्य समाज के्वल भारत का अतरीत नहीं, बसलक भल्वष्य करी उज््वल दिशा है । ' डिलिस्टिंग ' जैसरी प्रमुख मांग के साथ जिस तरह सरकार ने उनकरी आ्वाज़ को सुना है, उससे ल्वश्वास जगा है कि जलद हरी जनजातरी्य अससमता और अससतत्व के लिए सं्वैधानिक लक््य प्रापत किए जाएंगे । �
twu 2026 15