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मजहबी तंत्र और दलित

ज भारत में झटका और हलाल का विषय बड़ी

तीव्र गति से पब्लक डिस्कोर्स में उभरा है । हलाल
इककोनॉमी यानी अर्थवयिसरा का एक प्रचंड सांप्रदायिक रूप सुरसा की तरह हिन्दू धर्म की सामाजिक , सांस्कृतिक और धार्मिक वयिसरा कको निकालने का प्रयास कर रहा है । यह एक ऐसा विषय है , जिसे 2004 से जनता के मधय मैने रखने का प्रयास किया है । यह इतना गंभीर विषय है कि मांस बेचने वाली कुछ कट्टर हिन्दू दलित जातियों के लकोगों के घरों में पीर यानी मुबसलम प्रतीक कको सरावपत करके उसकी पदूजा हकोने लगी है ।
वासति में दलित जातियों के इस प्रकार के सांस्कृतिक एवं धार्मिक भटकाव का कई कारण है ; उदाहरणार्थ जम्मू-कशमीर में धारा-370 के कारण दलितों के विकास का मार्ग अवरुद्ध था । संवैधानिक प्रावधान के उपरांत भी उसका वयािहारिक रूप देश के अनयानय प्रांतों की तरह जम्मू-कशमीर में देखने कको नहीं मिला । दशकों तक संवैधानिक आड़ में दलितों का शकोषण करने वाले राजय के मजहबी शासकों के कार्यकाल में दलित बंधक बन गए और हिन्दू जनसंखया कको अपना घर छकोड़ने के लिए बाधय कर दिया गया । ददूसरी बार पदूण्स बहुमत से प्रधानमंत्ी नरेंद्र मकोदी के नेतृति में बनी केंद्र सरकार ने सत्ा संभालने के उपरांत जिस तरह छदम संवैधानिक आड़ लेकर सत्ा चलाने की उस नियकोवजत यकोजना कको एक झटके में धिसत कर दिया , जिसे धारा- 370 और 35ए की आड़ में िषषों से मजहबी हितों कको पदूरा करने के लिए अंजाम दिया जा रहा था । धारा-370 की एक झटके से विदाई और राजय में भारतीय संवैधानिक वयिसरा कको कायम करने के परिणाम तीसरे दशक के पहले ही वर्ष में देखे जा सकता हैं । राजय में वत्सतरीय पंचायती वयिसरा कको लागदू करने , सफलतापदूि्सक चुनाव कराने और वयिसरा कको ठीक करने की दिशा में मकोदी सरकार हर वह निर्णय ले रही है , जिससे राजय सिाभाविक रूप से देश की मुखय धारा से जुड़ रहा है । इसका सबसे बड़ा लाभ राजय में रहने वाले उस दलित वर्ग कको मिला है , जको िषषों से दासता वाला जीवन जीने के मजबदूर था ।
जम्मू-कशमीर राजय में डीडीसी के चुनाव में दलितों कको पहली
बार मतदान करके ऐसा लगा कि वह भी भारत के नागरिक हैं । जम्मू-कशमीर में बदलाव ने जको सकारातमक संकेत दिए हैं , उसका प्रभाव अब पबशचम बंगाल , तमिलनाडु और केरल तक देखा जा सकता है । तीनों राजयों में दलित वर्ग की जनता की निगाह प्रधानमंत्ी मकोदी और भाजपा पर टिकी है । उनहें ऐसा लग रहा कि इन राजयों में जब भाजपा की सरकार बनेगी , तभी उनका भी समग्र कलयाण सुवनबशचत हको सकेगाI केंद्र में सत्ा संभालने के बाद मकोदी सरकार ने जिस तरह से देश की गरीब , पिछड़ी और दलित जनता कको केंद्र में रखकर विकास यकोजनाओं कको लागदू करने की मुहिम प्रारमभ की , उसके सफल और सकारातमक परिणाम देखे जा सकते हैं ।
इसके बावजदूद हलाल इककोनॉमी ने एक ऐसे तंत् कको पदूरे देश में पैदा कर दिया है , जिसमें मजहबी आर्थिक हितों की पदूवत्स की जा रही है । मजहब की आड़ में हलाल प्रवरिया का पालन करने के कारण उन हिंददू वयिसायी वर्ग के लिए रासते बंद हको रहे हैं । रकोजगार के नाम पर भेदभाव हकोने के साथ ही हलाल प्रमाणपत् के नाम पर उगाही का एक नया जरिया पैदा कर दिया गया हैI हलाल वयिसरा के नाम पर इसलामी नियमों का अनुपालन करने और हलाल मांस के काम में बुतपरसत , गैर-मुबसलम अर्थात हिन्दू कको रकोज़गार से ददूर किया जा रहा है । देखा जाए तको हलाल इककोनॉमी कको एक भकोजन पद्धति से जकोड़ कर पदूरी समानांतर अर्थवयिसरा के रूप में फैलाया गया है और सरकारी कानदूनी बाधयता के कारण अपना माल बेचने के लिए बाबा रामदेव जैसे कट्टर हिन्दू वयिसायी भी हलाल प्रमाणपत् हासिल करने के लिए , लाखों रुपए खर्च कर रहे हैं । ऐसे में केंद्र सरकार कको यह विचार करना हकोगा कि हलाल वयिसरा पर अंकुश किस तरह से लगाया जाए ? हलाल वयिसरा के दुषपरिणाम जिन हिन्दू जातियों कको भुगतना पड़ रहा है , मकोदी सरकार उनके दर्द की दवा भी उसी प्रभावी तरह से तलाशने का प्रयास करेगी , जैसा प्रयास ककोरकोना कको मात देने के लिए किया गया है ।
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