eMag_Feb 2021_Dalit Andolan | Page 13

काम करने वाले मजदूरों को भी सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने का निर्णय लिया है । बजट में बताया गया है कि नए श्म कानून के माधयम से सभी श्ेणी के मजदूरों के लिए नयूनतम मजदूरी की वयवसथा तो लागू होगी ही , साथ ही उनहें भी कर्मचारी राजय बीमा निगम के अंतर्गत लाया जाएगा । महिला कामगारों के लिए सरकार विशेष सुरक्षा प्रदान की जाएगी । अपने बजट भाषण में केनद्रीय वित्त मंत्ी श्ीमती निर्मला सीतारमण ने आतमतनभ्षर भारत का विजन प्रसिुि करते हुए कहा है कि यह बजट 130 करोड़ भारतीयों की एक सप्ट अभिवयसकि है । बजट के माधयम से रा्ट्र पहले , किसानों की आय दोगुनी करने , मजबूत अवसंरचना , सवसथ भारत , सुशासन , युवाओं के लिए अवसर , सभी के लिए शिक्षा , महिला सशसकिकरण , समावेशी विकास , इतयातद का संक्प और मजबूत होगा ।
बजट 2021 के माधयम से केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति के साथ ही महिलाओं के लिए चलाई गई सटैंडअप इंडिया
योजना में मातििंन मनी को घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया । इसमें कृषि से संबंधित क्रियाकलापों के लिए दिये जाने वाले ऋणों को शामिल किया जायेगा । इसी तरह और वनवासी वर्ग में सभी को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए मोदी सरकार जनजातीय क्षेत्ों में 750 एकिवय मलॉडल रिहायशी स्कूलों की सथापना करने जा रही है । दलित वर्ग के छात्ों के लिए पोसट मैट्रिक छात्वृत्ति योजना को पुनतः प्रारंभ किया गया और 2025-2026 तक अर्थात छह वरषों के लिए 35,219 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता का प्रबंध किया गया है । इसका लाभ देश के लगभग चार करोड़ दलित छात्ों को मिलेगा । दलित क्याण के लिए बजटीय आवंटन में पिछले वर्ष की तुलना में 51.65 % की वृद्धि की हैं । इससे समझा जा सकता है कि मोदी सरकार दलित , पिछड़े और गरीब जनता के प्रति कितनी संवेदनशीलता से काम कर रही है । आम जनता के लिए नयूनतम सरकार-अधिकतम शासन का सनदेश देने वाले बजट-2021 के माधयम से हर क्षेत्
में आतमतनभ्षरता पर जोर दिया है ।
बजट-2021 के माधयम से केंद्र सरकार ने आतमतनभ्षर भारत के समबनध में अपने दृष्टकोण को सामने रखा है । यह कोई नया विचार नहीं है । प्राचीन हिनदू धर्म और संसकृति वाला भारत देश वैदिक काल से आतमतनभ्षर रहा है । आतमतनभ्षर होने के कारण भारत की अपनी विशेष पहचान रही है और भारत सर्वाधिक धनवान देशों में एक था । प्राचीन काल से आतमतनभ्षर भारत अपने वैभव को मधयकाल तक बनाए रखने में तब भी सफल हुआ था , जब विदेशी मुससिम आक्रांताओं ने भारत को लूटने-खसोटने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी । अर्थवयवसथा के आधार पर भारत 17वीं सदी तक के मधययुगीन विशव की सबसे बड़ी अर्थवयवसथा के रूप में अपना परचम लहरा रहा था । तरिटिश सत्ता के हाथों में कमान आने के बाद भारत की समृद्धि को सुनियोजित तरीके से लूटने का जो सिलसिला प्रारमभ हुआ , वह सविंत्िा के बाद भी किसी न किसी रूप में जारी रहा । इसका सर्वाधिक नकारातमक परिणाम दलित , पिछड़े , वंचित और गरीब वर्ग के रूप में सामने आया , जो अपने विकास की राह लगातार देख रहे थे ।
मोदी सरकार के सत्ता संभालने के बाद विकास की जो समावेशी प्रक्रिया प्रारमभ हुई , उसका लाभ सप्ट रूप से नगरीय भारत से लेकर ग्ामीण भारत में अब देखा जा सकता है । भारत को पुनतः वैभव के शीर्ष पर ले जाने के उद्देशय से मोदी सरकार ने आतमतनभ्षर भारत के जिस लक्य को हासिल करने का संक्प लिया है , उसकी कार्य योजना का सवरूप भी बजट में देखा जा सकता है । कोरोना काल में ठपप हुई अर्थवयवसथा और कोरोना संकट से निपटने के लिए उठाये गए कदमों के कारण आये आर्थिक दबाव के बावजूद बजट में सामाजिक-आर्थिक प्रगति की दृष्ट से जो कदम उठाये गए हैं , उनका परिणाम निसंदेह अगले कुछ माह में दिखने लगेगा , जिसका सीधा लाभ दलित , पिछड़े , वंचित और गरीब जनता को मिलेगा । �
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