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बदलती हवा
बंगाल की
हिं मानयिाओं को तार-तार कर रही ममता सरकार
सा और प्रतिशोध की राजनीति ने पश्चिम बंगाल को बंधक बना लिया है । लोकतंत्र की सभी
के कार्यकाल में एक सामानय वयश्ि का जीना दूभर हो गया है । राजय में ममता सरकार की कार्य प्रहरिया और हिंसा तंत्र की सहरियता के कारण आम जनता को ऐसा लगने लगा है कि राजय में लोकताशनत्रक वयवस्ा के तहत चिुनी हुई सरकार नहीं , बल्क पूरा गुंडातंत्र सत्ा चिला रहा है ।
लगभग दो दशक पहले तृणमूल नेता के रूप में ममता बनजजी पश्चिम बंगाल में वामपंथी हिंसा से पीड़ित लोगों को जब राजधानी हद्ली लेकर आयी थी , उस समय ऐसा प्रतीत हो रहा था कि वासिव में कोई नेता जन सरोकार को लेकर हचिंतित है और अगर ऐसा नेता सत्ा में आता है , तो जनता सवयं को धनय महसूस करेगी । कुछ वर्षों बाद ममता बनजजी को सत्ा मिल भी गयी , पर उनके शासन के हवर्य में जैसा सोचि कर जनता ने उममीद लगायी थी , वैसा जमीनी सिर पर नहीं हो पाया और पश्चिम बंगाल की जनता हिंसा , उतपीिन , तुष्टिकरण और भ्र्टिाचिार के जाल में फंसकर असहाय हो कर रह गयी । राजय में वामपंथी सरकार के 34 साल लंबे कार्यकाल के दौरान बंगाल में हिंसा का वैसा तंत्र नहीं था , जैसा ममता के कार्यकाल में देखा जा रहा है । ममता के कार्यकाल के दौरान गुंडातंत्र जिस तरह से राजय में हावी हुआ , उसके कारण पूरे राजय में भय का माहौल बना हुआ है । यह ममता बनजजी की राजनीतिक असफलता ही कही जाएगी कि वह अपने जुझारूपन के चिलते मुखयमंत्री तो बन गई , लेकिन वामपंथी दलों और उनके कैडर से निपटिने के लिए उनिोंने जिस हिंसक तौर- तरीकों का सहारा लेकर गुंडा तंत्र को प्रश्रय दिया , वही गुंडा तंत्र पूरे राजय के लिए बड़ी समसया का रूप ले चिुका है । यही वह गुंडा तंत्र है , जिसकी दम पर तृणमूल नेता अपने राजनीतिक विरोधियों खासतौर पर भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं के विरुद्ध हिंसक घटिनाओं को लगातार
अंजाम दिया जा रहा है ।
राजनीतिक विरोधियों के विरुद्ध हिंसा और उतपीिन की रणनीति पर काम कर रही ममता सरकार के अब तक के कार्यकाल के दौरान मुशसलम तुष्टिकरण भी जनता के लिए बड़ा सिरदर्द है । मुशसलम तुष्टिकरण की यह प्रवृहत् देश , समाज और राजय के लिए खतरनाक सिर पर पहुंचि चिुकी है । अवैध रूप से भारत में घुसे बंगलादेशी , रोहिंगया नागरिक राजय के हर हिससे में अपनी पैठ बना चिुका है । ममता सरकार से इन अवैध नागरिकों को पूरा सहयोग और लाभ मिल रहा है । ममता सरकार का हाथ सिर पर होने के कारण यह अवैध नागरिक आपराधिक गतिविधियों के साथ ही रा्ट्र की सुरक्ा के लिए भी नए-नए खतरे पैदा कर रहे हैं । पिछले दिनों राजय में आतंकवादी संगठन अलकायदा और आईएसआईएस के साथ मिलकर भारत विरोधी साजिश रचि रहे अवैध बांगलादेशी और रोहिंगया नागरिकों की गिरफ़िारी से यह खुलासा हो चिुका है कि पाकिसिानी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई भारत विरोधी गतिविधियों के लिए भी इनका इसिेमाल कर रही है । ऐसा नहीं है कि यह सब जानकारी ममता बनजजी के संज्ान में नहीं हैं । इसके बावजूद वह अपनी आंखे सिर्फ वोटि बैंक के लिए बंद किये हुए हैं । राजय में मुशसलम आबादी के लिए ममता सरकार ने अपने सब दरवाजे तो खोल दिए हैं , पर इन दरवाजों से गुजरने की कोई इजाजत बहुसंखयक हिनदू आबादी को नहीं है अर्थात हिनदू हितों के मू्यों पर मुशसलम आबादी को बढ़ावा देने की राजनीति के चिलते हिनदू आबादी असहाय होकर जीवनयापन के लिए मजबूर है ।
राजनीति के नए मानक स्ाहपि करने में जुटिी ममता सरकार के कार्यकाल में वयापि भ्र्टिाचिार से भी आम जनमानस त्रसि है । सरकारी हो या गैरसरकारी योजनाएं या फिर केंद्र सरकार की जनक्याणकारी योजनाएं , किसी भी योजना का लाभ जनता को तभी मिल पा रहा है , जब वह ममता सरकार के गुंडा तंत्र से लेकर सरकारी तंत्र को
खुश करता है । ' कटि-मनी ' के नाम पर जनता के धन की वर्षों से हो रही लूटि-खसोटि पर ममता की चिुपपी यह सिद्ध करती है कि भ्र्टिाचिार पर उनका कोई अंकुश नहीं है । कहा जा सकता है कि ममता बनजजी ने अपने पूरे तंत्र को ' कटि- मनी ' वसूल करने की मूक सवीकृति दे रखी है और ' कटि- मनी ' के नाम पर ऊपर से नीचिे तक सभी जनधन की लूटि में हिससा बांटि करने में जुटिे हैं । इस हवर्य में राजय के राजयपाल ने भी कई बार ममता को आगाह किया , लेकिन इसका कोई सकारातमक प्रभाव जनता को नजर नहीं आता है । ममता सरकार की कार्यप्रहरिया और नीतियों से अब उनके अपने नेता भी त्रसि होकर तृणमूल कांग्ेस को छोड़ने में जुटि चिुके हैं । एक के बाद एक करके ममता के कई सहयोिगयों का तृणमूल कांग्ेस से विदा ले लेना तृणमूल कांग्ेस के लिए झटिका कहा जा सकता है ।
2019 के लोकसभा चिुनावो में राजय में भाजपा को जो सफलता मिली , वह भाजपा नेताओं और नीतियों की विजय है । भाजपा को लेकर बिे-बिे राजनीतिक पंडितों का ‘ पंचिाग ’ गिबिा गया है । आगामी विधानसभा चिुनावों में तृणमूल को पराजित करने के लिए भाजपा लगातार सकारातमक रूप से राजय में सहरिय है और इसका लाभ पार्टी को मिल रहे जनसमर्थन के रूप में देखा जाता है । वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल में कुछ महीनों का समय ही शेर् रह गया है । ममता की कार्यप्रणाली के विरुद्ध भाजपा ने जिस तरह से जनता की आवाज को बुलंद किया है , उसका परिणाम तृणमूल के भीतर बन रही विद्रोह की शस्हि के रूप में दिखाई देने लगा है । पिछले लोकसभा चिुनावों ने यह सिद्ध कर दिया है कि राजय में मुखय विपक्ी पार्टी भाजपा हो गई है और वामपंथी हांशिये पर चिले गये हैं । भाजपा के रा्ट्रवादी विमर्श को समझ रही जनता 2021 में बड़े परिवर्तन की वाहक बनेगी , इसमें कोई संदेह नहीं है ।
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