Dec 2025_DA | Page 32

समाज

कोंड, कोरिया, कोया, कूलिया, गोंड, गौड़, जातपू, थोटषी, धूलिया, नककला, नायकपोड, परधान, पोरजा, भगता, भषील, मलिस, मन्नदोरा, मूकदोरा, यानादि, येरूकला, रेवड्दोरा, रैना, बाल्मीकि, सवरा, सुगांलषी( बंजारा / लंबाडा) कुरूंबा, बडागा, टोडा, काडर, मलायन, मुशुवन, उदालषी, कनिककर, बोडो गऊबा, गुडोब गऊबा, चेनदू, पूर्जा, डोंगरिया, खोंड, चोलानायकन, कादर, कट्ाउनायकन, इरूला, पजियन आदि निवास करते हैं ।
इन आदिवासषी समुदायों का मुखय वयिसाय कृषि, खाद् संग्हण तथा मछलषी पालन रहा ह । जल, जंगल तथा जिषीन पर अवतरििण होने से इन आदिवासषी लोगों के जषीिन-यापन का प्रमुख सहारा छिनने लगा है । आदिम जनजातियों कषी दशा कषी सिषीक्ा के लिए भारत सरकार ने सन् 1969 में योजना आयोग के अनतग्वत " शषीलु आव समिति " गठित कषी, जिसने अपने निषकषगों में यह पाया कि जनजातषीय समाज के अधिकांश लोग अतयवधक पिछड़े हुए हैं और इनमें से कुछ तो अभषी भषी आदिकालषीन अन्न संचय युग में जषी रहे हैं । इस समिति ने इन समुदायों पर विशेष धयान देने कषी आवशयकता पर बल दिया । बाद में सन् 2006 में वनाश्रित समुदाय के अधिकारों को मानयता देने के लिए " अनुसूचित जनजाति एवं अनय परमपरागत निवासषी( वनाधिकारों को मानयता) कानून " बनाया गया । यह कानून देश के जंगलों को बचाने तथा वनवासषी आदिवासियों
को वनाधिकार प्रदान करने कषी दृष्टि से अतयवधक महतिपूर्ण है ।
इससे पहले सितंत्ता मिलने से पूर्व अनेक राजनषीवतक चिनतकों एवं समाज सुधारकों का धयान आदिवासियों कषी दयनषीय दशा कषी ओर गया था, किनतु पराधषीन होने के कारण उनहें आदिवासियसों के कलयाण में कोई राजकषीय सहायता प्रापत न हो सकषी । अंग्ेज़ों ने उनहें एकाकषी और असहाय इसलिये छोड़ दिया था कयोंकि वह यह समझते थे कि इन जंगलषी इलाकों का प्रशासन संभालना उनके लिए मुसशकल कार्य है और अंग्ेज़ों के विरूद्ध युद्ध कषी शुरूआत करने वाले आदिवासियों के प्रति उनके मन में सहानुभूति भषी नहीं थषी ।
सितंत्ता मिलते हषी प्रथम प्रधानमंत्री पसणडत जवाहर लाल नेहरू ने आह्ान किया कि आदिवासषी जषीिन एवं संसकृवत को पूर्णतः समिान दिया जाना चाहिए तथा आदिवासषी भाइयों के साथ प्रेमपूर्ण वयिहार किया जाना चाहिए । वह चाहते थे कि आदिवासषी नागरिक भषी सामानय भारतषीयों कषी तरह आधुनिक जषीिन शैलषी तथा उपलबध सुविधाओं का इस प्रकार उपभोग करें कि उनके परमपरागत जषीिन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े । उनहोंने आदिवासषी भाषाओं एवं बोलियों के संरक्ण पर बल दिया तथा आदिवासषी जिषीन एवं जंगलों के संरक्ण कषी अपषील कषी ।
जब किसषी जाति, समाज या समुदाय पर शासकषीय उपेक्ा, शोषण और अतयाचार का दंश
झेलना पड़ता है । तब कुछ लोग हमददजी का नाटक कर अपना उललू सषीध करने हेतु ऐसे लोगों के बषीच पहुंच जाते हैं । सितंत्ता मिलते हषी वरिसशचयन मिशनरषी ऐसे इलाकों में सेवा के नाम पर धर्मानतरण का खेल-खेलने में लग गए हैं और अभषी पिछले कुछ िषगों से खाड़ी देशों के मुससलि नेताओं ने इसषी लक्य को धयान में रखते हुए इन इलाकों में धर्मानतरण हेतु धन उपलबध कराना शुरू कर दिया है । उतिर-पूिजी क्ेत् के आदिवासषी इलाकों में विशेषकर खासषी, लुशाइक तथा नागा समूहों में ईसाइयों ने भारत संखया में धर्मानतरण किए हैं । ऐसे धर्मानतरण प्रायः बलपूर्वक या बहला-फुसलाकर किए जाते रहे हैं । आदिवासषी इलाकों कषी दूसरषी बड़ी समसया उनका हथियार उठाना है । शोषण एवं विसथापन से त्सत उतिर पूिजी तथा मधय क्ेत् के आदिवासियों ने सरकार के विरूद्ध सशसत् संघर्ष छेड़ दिया है तथा वह नकसलवादियों के रूप में केंद्र सरकार के सिक् कानून वयिसथा कषी चुनौतियां खड़ी करते रहते हैं । इसलिए अब यह बाहर जरुरषी हो गया कि वर्तमान कषी आवशयकता के अनुरूप आदिवासियों के जषीिन-यापन के अधिकारों का संरक्ण किया जाए, उनहें उनकषी परमपराओं के साथ आधुनिकता का समनिय करने हेतु पर्यापत अवसर उपलबध कराए जायें तथा उनहें समाज और विकास कषी मुखय धारा से जोड़ा जाए, तभषी आदिवासियों के समपूण्व विकास के सपने को साकार किया जा सकेगा । �
32 fnlacj 2025