Dec 2025_DA | Page 19

नषट करेगा हषी, साथ हषी उससे दलित वर्ग का भषी रंचमात् हित नहीं होगा ।
आप मुझे यह कहने कषी अनुमति देंगे कि भले हषी आप कितनषी भषी सहानुभूति रखते हों पर आप संबद्ध पक्ों के लिए ऐसे अति महतिपूर्ण तथा धार्मिक महति के मामले पर कोई ठषीक निर्णय नहीं ले सकते । सपषट है कि गांधषी के लिए दलितों का हित दूसरे सथान पर था, उनकषी पहलषी प्राथमिकता थषी हिंदू धर्म को तथाकथित सर्वनाश से बचाना जबकि आंबेडकर अपना पहला दायिति दलितों का कलयाण और उतथान चाहते थे । उनहें हिंदू धर्म कषी वर्ण. वयिसथा को खति करना था जोकि सामाजिक असमानता का मूल कारण है । आंबेडकर हिंदू जाति. वयिसथा द्ारा दलितों पर लादे अलगाव को और तदजनय हषीन भावना से दलितों को छुटकारा दिलवाने का एक मात् रासता धर्म परिवर्तन को पाते थे बशततें कि अपनाया जाने वाला नया धर्म दलितों के साथ हिंदू धर्म में जारषी तमाम प्रकार के बहिषकार, बेरूखषी और पूिा्वग्हों से मुकत हो । पुरूष सतिातिक समाज ने सबसे जयादा कठोरए उत्पीड़नकारषी, शोषणकारषी और अनयायपूर्ण रहा है कयोंकि यह नारषी को सभषी मूलभूत अधिकारों से वंचित कर उसे नारकषीय जषीिन जषीने पर
मजबूर करता है जबकि आयगों के समाज में सत्री और शूद्रों को एक हषी ससथवत में रखा जाता था । शिक्ा के अधिकार से भषी उनहें वंचित रखा जाता था । परिवर्तनवादषी समाज वयिसथा के प्रणेता डलॉ आंबेडकर ने देश का क़ानून मंत्री रहते हुए सत्री शिक्ा और समान अधिकार को समाज में सथावपत करने के लिए विधिवत हर संभव प्रयास किया । वे नारषी शिक्ा, सितंत्ता, समानता तथा अससिता के प्रबल समर्थक थे । जयोवतबा फुले कषी हषी तरह इनहोंने सबसे अधिक जोर सत्री शिक्ा पर दिया कयोंकि शिक्ा हषी वह रासता है जिससे होकर अपने अधिकारों को पाया जा सकता है और पिततृ सतिातिक वयिसथा तथा संसथा से मुसकत भषी पाया जा सकता है । सत्री कषी दशा हषी किसषी देश कषी दशा, प्रगति और उन्नति निर्धारित करतषी है । अतः डलॉ आंबेडकर का मानना था कि शिक्ा हषी प्रगति और उन्नति का मार्ग खोल सकतषी है, शिक्ा हषी सामाजिक रिासनत का पहला कदम है । सितंत्ता प्रासपत के समय भषी ससत्यों कषी दशा काफषी दयनषीय थषी । संपवति में उनका कोई अधिकार नहीं था । बहुपत्नी विवाह ससत्यों को नारकषीय जषीिन जषीने पर बाधय करता था । पति द्ारा परितयाग कर दिए जाने पर उसके गुजर. बसर का कोई साधन न होता था । डलॉ आंबेडकर भारतषीय ससत्यों कषी सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक ससथवत में परिवर्तन चाहते थे । वो एक ऐसा क़ानून बनाना चाहते थे जो ससत्यों कषी सामाजिक, आर्थिक और कानूनषी ससथवत में आमूलचूल परिवर्तन कर सके । इसलिए उनहोंने ससत्यों के अधिकार के लिए हिनदू कोड बिल बनाया जिसके कारण कई बार उनहें वयसकतगत रूप से अपमानित भषी होना पड़ा ।
ससत्यों कषी प्रगति के लिए उठाए गए इस कदम को विरोधों का सामना करना पडा । इस बिल में आठ अधिनियम बनाए गए थे जो इस प्रकार हैं- हिनदू विवाह अधिनियम, विशेष विवाह अधिनियम, गोद लेना दतिक ग्हण अलपायु संरक्ता अधिनियम, निर्बल तथा साधनहषीन परिवार के भरण. पोषण अधिनियम, हिनदू उतिराधिकारषी अधिनियम, अप्रापत वयय संरक्ण समबन्धी अधिनियम, उतिराधिकारषी अधिनियम
और विधवा विवाह को पुनर्विवाह अधिनियम, पिता कषी संपवति में अधिकार अधिनियम । संविधान ने ससत्यों को हर वो अधिकार दिया जिससे वह वंचित थषी । पुरूष प्रधान भारतषीय समाज पर आघात करते हुए यह बिल भारतषीय महिलाओं को पुरूषों के बराबार कानूनषी और सामाजिक अधिकार के मांग पर आधारित था । हिनदू कोड बिल के तहत किसषी भषी जाति कषी लड़कषी या लड़के का विवाह होना अवैध नहीं था । इस कोड के अनुसार पति और पत्नी एक समय में एक हषी विवाह कर सकते है । कोई भषी पति पहलषी पत्नी के और कोई भषी पत्नी पहले पति के रहते दूसरा विवाह अगर करे तो दंडनषीय अपराध माना जाएगाए पति के गुजर जाने पर पत्नी को उसकषी संपवति में संतान के बराबर हिससा मिलेगाए पिता कषी संपवति में पुवत्यों को भषी पुत्ों के समान अधिकार दिया जाएगा ।
विधवाओं के लिए दूसरे विवाह का प्रावधान, पति के अतयाचार से पषीवड़त पत्नी के लिए तलाक का प्रावधान और तलाक देने कषी ससथवत में पति को पत्नी के गुजारा भतिा देने का प्रावधान, महिलाओं को बच्चे न होने पर अपनषी िजजी से बच्चा गोद लेने का प्रावधान इतयावद परनतु दुर्भागयिश कुछ कट्रपंथियों के कारण यह बिल संसद में पारित न हो सका और डलॉ आंबेडकर ने क़ानून मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया । वर्तमान समय में महिलाओं को पुरूषों के समान जो शैक्वणक, आर्थिक, सामाजिक और समसत अधिकार प्रापत हैं, इसका श्रेय हिनदू कोड बिल को जाता है कयोंकि बाद में हिनदू कोड बिल कई हिससों में बंटकर संसद में धषीरे. धषीरे पारित होने लगा । इस बिल के कई प्रावधानों को संसद में दूसरषी सरकारों ने पास कराकर अपना वोट बैंक बनाया । सदियों से जिस अधिकार से ससत्यां अछूतषी थीं, उससे संविधान ने हषी अवगत कराया । नारषी सितंत्ताए अससिता और समिान के लिए बाबा साहेब आंबेडकर ने संविधान में कई प्रावधानों को सुवनसशचत किया । डलॉ आंबेडकर कषी हषी देन है कि भारतषीय क़ानून का प्रारूप बदला और उसमें मानिषीयता प्रसार हो पाया । �
fnlacj 2025 19