Dec 2025_DA | страница 17

उनके पिता धार्मिक और अनुशासन प्रिय वयसकत थें । दैनिक उपासना करते थे । पिता रामजषी सकपाल का यह प्रभाव बालक भषीि पर भषी पड़ा । रामजषी सकपाल पहले रामानंदषी वैषणि थे, बाद में कबषीर पंथषी हो गए । आंबेडकर ने जषीिन में सियं को कबषीर कषी तरह एक विद्रोहषी नायक के रूप में पाया । इसका प्रमाण जानने के लिए हमें उनके द्ारा दिए गए मई 1956 के भाषण को पढ़ना चाहिए । अछूत परिवारों में वर्ण. वयिसथा कषी पोल खोलने वाले कबषीर से बड़ा नायक कौन हो सकता है? सन् 1907 में जब तरुण भषीिराव ने मैट्रिक कषी परषीक्ा पास कषी तब यह किसषी अछूत समुदाय से आने वाले युवक के लिये यह बहुत बड़षी उपलसबध थषी ।
उस मौके पर मराठषी लेखक और समाज सुधारक दादा कृषणाजषी ने भषीि राव के पुसतक
प्रेम को देखते हुए उनहें गौतम बुद्ध पर आधारित मराठषी पुसतक गौतम बुद्ध का जषीिन कषी प्रति भेंट कषी । निसंदेह युवा आंबेडकर पर बुद्ध का गहरा प्रभाव पड़ा । उनहोंने पालषी कषी किताबें उनहीं दिनों पढ़ डालषी थीं । उन दिनों बौद्ध धर्म सामाजिक अधिक था धार्मिक कम । डलॉ आंबेडकर कबषीर, रैदास, दादू, नानक, चोखामेला, सहजोबाई आदि से प्रेरित हुए । आधुनिक युग में जयोवतबा फुले, सावित्री बाई फुले, रामास्वामी नायकर पेरियार, नारायण गुरु, छ्त्पति शाहूजषी महाराज, गोविनद रानाडे आदि ने सामाजिक नयाय को मजबूतषी के साथ सथावपत करने में महतिपूर्ण भूमिका निभाई । डलॉ आंबेडकर ने कबषीर और जयोवतबा फुले को अपना गुरु बताया और अपनषी सुप्रसिद्ध पुसतक " हू वेयर दषी शुद्राज " फुले जषी को समर्पित किया । अपने
समर्पण में 10 अकटूिर 1946 को डलॉ आंबेडकर में लिखा है कि जिनहोंने हिनदू समाज कषी छोटषी जातियों से लेकर उच्च िणगों के प्रति उनकषी गुलािषी कषी भावना के समबनध में जागतृत किया । विदेशषी शासन से मुसकत पाने में सामाजिक लोकतंत् कषी सथापना अधिक महतिपूर्ण है । इस सिद्धांत कषी सथापना उस आधुनिक भारत के महान राषट्रपिता जयोवतराव फुले ने कषी । डलॉ आंबेडकर यह मानते थे कि फुले के जषीिन दर्शन से प्रेरणा लेकर हषी वंचित समाज मुसकत पा सकता है ।
डलॉ आंबेडकर ने विभिन्न देशों के संविधान का अधययन करने के बाद लोकतंत् कषी मजबूतषी के लिए एक ऐसे संविधान का निर्माण कियाए जिसमें समाज के सभषी लोगों को अधिकार दिए गए । वे केवल दलितों, आदिवासियों या पिछड़ों
fnlacj 2025 17