विनम्र श्रद्ांिनल
दिवंग्त वरिष््ठ पत्कार संजय दीनषि्त मूल रूप से उत्तर प्रदेश के निवासी ्थे । उत्तर प्रदेश की धर्ती से निकलकर उन्दिोंने दिल्ली-एनसीआर कयो अपनी कम्षभूमि बनाया और ्तीन दशकों से अधिक समय ्तक राष्ट्ीय राजधानी के पत्कारर्ता जग्त में अपनी विशिष््ट पहचान स््थथापित की । विशेर् रूप से प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, आईटिीओ और दिल्ली के मीडिया गलियारों में वे ' गुरुजी ' के नाम से सम्मािपूव्षक जाने जा्ते ्थे । अपनी निभभीक पत्कारर्ता, गहन नवर्य-ज्ाि और स्प्टटिवानद्ता के कारण संजय दीनषि्त सा्थी पत्कारों के बीच अत्यं्त लयोकप्रिय ्थे । उन्दिोंने पत्कारर्ता कयो केवल आजीविका का माध्यम ििीं, बष्ल्क जनसरयोकारों और सत्य के पषि में संघर््ष का माध्यम माना । अभावों और कन्ठि परिस््थथितियोों के बावजूद उन्दिोंने अपने सिद्ां्तों से कभी समझौ्ता ििीं किया । संजय दीनषि्त की पहचान एक ऐसे पत्कार की ्थी, ियो खबरों की गहराई ्तक पहुंचने और ्तथ्य सामने लाने के लिए हमेशा ्तत्पर रि्ते ्थे । उनका अनुभव, माग्षदश्षि और बेबाक व्यष्क््तत्व युवा पत्कारों के लिए प्रेरणा का स्यो्त ्था । यही कारण ्था कि दिल्ली के पत्कार उन्दिें स्ेि और सम्माि से ' गुरुजी ' कहकर पुकार्ते ्थे । उनका जीवन संघर््ष, स्वानभमान और बड़़े सपिों का प्र्तीक ्था । वे अपने पीछ़े केवल पत्कारर्ता की यादें ही ििीं, बष्ल्क सत्यनिष््ठा, निभभीक्ता और पेशे के प्रन्त समप्षण की ऐसी विरास्त छयोड़ गए िैं, ियो लंबे समय ्तक पत्कारर्ता जग्त का माग्षदश्षि कर्ती रहेगी । दिवंग्त संजय दीनषि्त का निधन पत्कारर्ता जग्त के लिए एक अपूरणीय क्षति है । ईश्वर दिवंग्त आत्मा कयो अपने श्रीचरणों में स््थाि दें ्त्था शयोकाकुल परिवार, नमत्ों और असंख्य शुभचिंतकोों कयो इस असहनीय दुःख कयो सहन करने की शक््तति प्रदान करें । विनम्र श्रद्ांिनल ।
अगस््त 2026
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