संपादकीय कवर स््टटोरी
देशी-विदेशी शक्तियोों की जुगलबंदी
भा रत मेें लम््बबे समेय सबे चल रही मेोदी सरकार अ्ब
विपक्ी शक््ततयों के सहनशक््तत सबे ्बाहर हो गयी है । केवल भारतीय विपक्ी दल ही नहीं ्बक््कक राष्ट्ीय एवं अन्तराराष्ट्ीय मेुस््ललिम एवं वरिश््चचयन लाव्बयाँ भी खुलकर विरोध मेें आ खड़ी हो चुकी थीीं । तथीाकवथीत काकरोच पार्टी नबे नीर् के छात्रों का ्बहाना लबेकर धरना प्रदशरान किया । उस तथीाकवथीत छात्र आंदोलन मेें विपक्ी दल एवं दबेशी-विदबेशी अराजक तत्िों नबे जन्तर-मेन्तर पर सरकार के विरुद्ध जमेकर जुगल्बंदी किया । लोकतन्त्र का ्बहाना लबेकर भारतीय युवाओं एवं किशोर आयु के लड़के-लड़वकयों नबे दबेश की छवि व्बगाड़नबे मेें कोई कमेी नहीं रखा । शहरों मेें ्बच्चों को पढ़ानबे की प्र्बल आकांक्ा पालबे दबेश के अभिभािकों का सिर लज्ा सबे झुक सा गया ।
जन्तर-मेन्तर पर छात्रों के धरनबे के नामे पर विपक्ी दल अपनबे खोयबे हुए जनाधार को पानबे की लालच मेें तो सम््ममिलित हुए किन्तु उन्हें भारी असफलता और निराशा भी हाथी लगा । राहुल गांधी, केजरीवाल, अखिलबेश यादव जैसबे अन्यान्य नबेताओं का सम्पपूर््ण दबेश मेें सोशल वमेविया के मेाध््यम सबे मेजाक उड़ाया गया । दबेश के प्रधान मेन्त्री नबे सोशल वमेविया के मेाध््यम सबे सीधबे जुड़कर ज्ब छात्र आन्दोलन के पक् मेें अपनी ्बात रखी तो विपक् को काठ मेार गया । इतना ही नहीं प्रधान मेंत्री जी नबे अपनबे एवं अपनी ्लिगटीय मेाता जी के प्रति अपमेान जनक भाषा के प्रयोग को भी अनुचित ठहराया ।
जन्तर-मेन्तर प्रदशरान मेें सम््ममिलित हुए लोगों के जाति, पंथी एवं समेुदाय का वि्चलबेषर् पर हमे अि्चय ध्यान आकवषरात करना चाहेंगबे । धरनबे मेें दलित जावतयों के नामे पर जार्ि-चर््मकार जाति और पिछड़़े िगरा के यादव जाति की संख्या सिारावधक थीी । पंथी के
नामे पर वरिश््चचयन एवं मेुस््ललिम समेुदाय के लोग भी समे मेात्रा मेें थीबे । सामेान्य हिन्दु समेुदाय के भोलबे-भालबे, नीर् पबेपर लीक विषय पर पीवड़त छात्रों की संख्या अत्यन्त अ्कप थीी । चंद्रशबेखर रािर् के आवाहन पर दलित िगटीय चर््मकार यानी जार्ि जाति एवं अखिलबेश यादव के नामे पर यादव जाति तथीा धमेारान्तरित ईसाई समेाज के हिंदपू विरोधी लोग इसाई वमेशनररयों के ्बुलािबे पर आयबे थीबे ।
कुल वमेलाकर इसमेें अंतराराष्ट्ीय ईसाई और मेुस््ललिम लॉ्बी का खबेल थीा । खबेल भी विदेशोों सबे धन मेंगाकर भारत मेें सत्ा के खबेल मेें सम््ममिलित होनबे सबे संबन््धधित षडयन्त्र सबे थीा । भारतीय संसद मेें एफ सी आर ए( Foreign Contribution Regulation Act- विदबेशी अंशदान विनियमेन अधिनियमे) नामेक अधिनियमे को पारित होनबे सबे रोकनबे के अतिरर्तत कुछ नहीं थीा ।
विदेशोों सबे प्रचुर मेात्रा मेें धन लाकर भारत मेें गरीबोों, दवलतों, पिछड़़े िगरा के लोगों एवं अन्यान्य जिन्हें भारत विरोधी मेानसिकता मेें ढाला जा सकता है, ऐसबे लोगों मेें धन वितरित किया जाता है । दलित-वनवासी समेाज के लोगों का सबेिा के ्बदलबे उनके धर््म को खरिदनबे का धन्धा भारत मेें इसाई एवं इ्ललावमेक लाबियोों द्ारा ्बड़ी तीव्र गति सबे हो रहा है । इसबे ही रोकनबे एवं दलित एवं वनवासी समेाज को धर््म पररितरान सबे ्बचानबे के लिए भारत सरकार का यह व्बल भारत मेें रहनबे वालबे दबेशी-विदबेशी लोगों के आँख की किरकिरी ्बना हुआ है ।
ऐसबे मेें दलित एवं अनुसपूवचत जनजाति के लोगों को जागृत करना एक चुनौति पपूर््ण कायरा है । अ्ब भारतीय दलित एवं आदिवासी समेाज को इन भारत विरोधी षड्यन्त्रों को समेझनबे की आि्चयकता है ।
अगस््त 2026
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