April 2026_DA | Page 3

संपादकीय

अवैध धर्मांतरण-विरोधी कानूनों की गंभीरता से होनी चाहिए सर्ीक्ा

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रत में अवैध रूप से कराया जाना वाला धर्म परिवर्तन सामाजिक एवं सांस्कृतिक रूप से चिंता का विषय है । विशेष रूप से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के लोगों का अवैध मतांतरण में काफी कोशिशों के बाद भी रोक नहीं लग पा रही है । देश के कई राजयों ने जबरन धमाांतरण को रोकने के लिए धमाांतरण-विरोधी कानून बनाए हैं । लेकिन कानूनों के उद्ेशय, कानूनों के दुरुपयोग और नागरिकों के अपने धर्म का पालन करने के मौलिक अधिकारों के साथ-साथ वयक्तगत पसंद और सवतंत्रता को लेकर कथित रूप से एक बहस भी जारी है ।
राजयों द्ारा बनाए गए धर्म परिवर्तन विरोधी कानून ऐसे कानूनी नियम हैं, जिनका उद्ेशय अवैध रूप से होने वाले धर्म परिवर्तन को नियंत्रित करना है, ताकि जबरदसती और धोखाधडी के माधयम से धर्म परिवर्तन को रोका जा सके । इन कानूनों के तहत किसी भी वयक्त को दूसरे धर्म में परिवर्तित होने से पहले सरकार से अनुमति प्ापत करना अनिवार्य कर दिया गया है । यह कानून विशेष रूप से किसी वयक्त को जबरदसती, धोखाधडी, अनुचित प्भाव या वित्ीय प्लोभनों के माधयम से परिवर्तित करने पर रोक लगाते हैं । इसके बाद भी अवैध रूप से होने वाले धर्म परिवर्तन पर अंकुश नहीं लग पा रहा है । अवैध धमाांतरण के कारण हिनदू जनसांख्यकीय बदलावों को लेकर चिंताएं जताई जा रही है और इसे बहुसं्यक हिनदू धर्म के लिए खतरा माना जा रहा है । वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर होने वाला दुष्प्िार, घृणासपद भाषण और गलत सूचना का प्सार हुआ है, जिससे विधायी हसतक्ेप की आवशयकता और भी बढ़ गई है । ऐसे में सांप्दायिक सद्ाव बनाए रखने और अवैध धमाांतरण के कारण उतपन्न होने वाले संभावित धार्मिक तनाव या संघषषों को कम करने के लिए धमाांतरण-विरोधी कानून अतयंत आवशयक हो गया है ।
देश के उच्चतम नयायालय ने भी यह सवीकार किया है कि अवैध धर्म परिवर्तन एक गंभीर मुद्ा है, जो संविधान का उललंघन करता है । देश में अवैध धमाांतरण विरोधी कानून
सवतंत्रता से पहले से लागू किया गया था, जिसे हिंदू प्धान रियासतों द्ारा जरिटिश मिशनरी प्भाव का विरोध करने के लिए लागू किया गया था । यह धमाांतरण विरोधी कानून 1930 और 1940 के दशक में लागू किए गए । यद्यपि सवतंत्रता के बाद राष्ट्ीय धमाांतरण विरोधी विधेयकों का विरोध हुआ, फिर भी अब बारह राजय विभिन्न धमाांतरण विरोधी कानूनों को लागू कर चुके हैं । भारतीय संविधान के अनुच्छेद-25 के अनुसार, सभी वयक्तयों को सवतंत्रता और सार्वजनिक वयवसथा, नैतिकता और सवास्थय के अधीन रहते हुए धर्म को सवतंत्र रूप से मानने, उसका अभयास करने और उसका प्िार करने का समान अधिकार है । लेकिन संविधान में कहीं भी अवैध रूप से होने वाले धमाांतरण का उललेख नहीं है ।
वासतव में देखा जाए तो देश में कोई राष्ट्ीय धमाांतरण विरोधी कानून नहीं है । आलोचकों के अनुसार अवैध धमाांतरण विरोधी कानून धार्मिक अलपसं्यकों, विशेष रूप से ईसाई और मुसलमानों को असमान रूप से प्भावित करते हैं, जो प्ायः धर्म प्िार की आड़ में धर्म परिवर्तन में संलग्न रहते हैं । ऐसे ततवों द्ारा अवैध धमाांतरण विरोधी कानूनों की संवैधानिकता को चुनौती देते हुए कई मामले विभिन्न नयायालयों में दायर किए गए हैं । वासतव में देखा जाए तो अवैध धमाांतरण विरोधी कानून एक जटिल मुद्ा है, जिसके लिए बहुआयामी दृष्टिकोण की आवशयकता है । वर्तमान समय में मौजूदा अवैध धमाांतरण-विरोधी कानूनों की पूरी तरह से समीक्ा की जानी चाहिए जिससे सपष्िता सुजनकशित हो सके, असपष्िता दूर हो सके और धार्मिक सवतंत्रता की संवैधानिक गारंटी के साथ तालमेल बिठाया जा सके । साथ ही अवैध धमाांतरण कानूनों को अधिकारों और एक सश्त कानूनी ढांचे के साथ सश्त बनाया जाना चाहिए ताकि जबरदसती और बल के प्योग को रोका जा सके । वयक्तयों को अवैध धमाांतरण से बचाने और धार्मिक सवतंत्रता के अधिकार को बनाए रखने के बीच संतुलन बनाना आवशयक है और इस विषय पर अब गंभीरता से विचार करके कदम उठाने की प्बल आवशयकता है ।
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