दो तोते दो तोते एक साथ बडे हुए. एक ददन तेज आंधी आई और दोनों बबछु ड गए. एक तोता चोरों की बस्ती में पहुुँच गया और दूसरा ऋषि के आश्रम में. दोनों वहीीँ रहने लगे. एक ददन नगर का राजा शिकार पर ननकला. वह चोरों की बस्ती के पास पहुंचकर सरोवर के ककनारे लेटकर आराम करने लगा. इतने में ककसी की क क ि वाणी सुनकर उसकी नींद टू ट गयी. यह आवाज ककसी तोते की थी. वह कह रहा था- अरे यहाुँ कोई है. इसके गले में हीरे और मोनतयों की माला है. इसकी गदकन दबाकर माला ननकाल लो और लाि को झाडडयों के पीछे गाड दो. तोते को यह सब बोलते देखकर राजा कु छ डर गया और वहां से ननकल पडा. आगे एक आश्रम आया. वह अन्दर गया तो एक तोता बोला- आइये श्रीमान. बैदिये. प्यास लगी है तो िंडा पानी लीजजये और भूख लगी है तो मीिे फल खाइए. राजा ने देखा कक इस तोते का रंग रूप बबलकु ल चोर बस्ती वाले तोते जैसा था. उसने पूरी बात ऋषि को बताई तो ऋषि बोले- यह तो संगनत का असर है राजन. इसके प्रभाव से पिु-पक्षी भी नहीं बच सकते ~ अज्ञात